क्या तमिलनाडु में गिर जाएगी थालपति विजय की सरकार, समर्थन वापसी की किसकी धमकी!
Last Updated:May 20, 2026, 11:21 IST
Trouble for tvk led alliance: तमिलनाडु में नई-नवेली सरकार बनाने वाले अभिनेता से नेता बने सीएम सी. जोसेफ विजय की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. बहुमत के आंकड़े से दूर टीवीके गठबंधन में कैबिनेट विस्तार को लेकर रार मच गई है. सहयोगी दल माकपा (CPI-M) ने दोटूक चेतावनी दी है कि अगर विरोधी एआईएडीएमके (AIADMK) को सरकार में शामिल किया गया, तो वे अपना समर्थन वापस लेने पर गंभीरता से विचार करेंगे.
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क्या एआईएडीएमके के चक्कर में चली जाएगी थालपति विजय की कुर्सी, माकपा ने खोल दिया मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा, कहा- वैचारिक समझौता बर्दाश्त नहीं करेंगे!
तमिलनाडु की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. अभी हाल ही में राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले थलापति विजय सी. जोसेफ की सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से चूकने के बाद जैसे-तैसे जोड़-तोड़ और सहयोगियों के दम पर बनी तमिलगा वेत्रि कड़गम (TVK) सरकार को अब अपनों से ही तगड़ा झटका लगा है. सरकार में शामिल वामपंथी दल माकपा (CPI-M) ने मुख्यमंत्री विजय को बेहद कड़े लहजे में चेतावनी जारी कर दी है. इस चेतावनी के बाद राज्य के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विजय अपनी कुर्सी बचा पाएंगे?
सरकार में रार की असली वजह
मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, इस पूरे विवाद की जड़ विरोधी दल एआईएडीएमके (AIADMK) को कैबिनेट में शामिल करने की अटकलें हैं. दरअसल, चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके ने 108 सीटें जीती थीं, जो बहुमत के आंकड़े से 10 सीटें कम थीं. इसके बाद कांग्रेस, लेफ्ट और अन्य दलों के सहयोग से सरकार बनी. लेकिन अब खबर आ रही है कि एआईएडीएमके के एक धड़े को सरकार में मंत्री पद दिया जा सकता है, जिससे वामपंथी दल भड़क गए हैं.
माकपा की खुली और सीधी धमकी
माकपा के राज्य सचिव पी. शन्मुगम ने बुधवार को साफ-साफ कह दिया कि अगर मुख्यमंत्री विजय ने एआईएडीएमके को कैबिनेट में जगह दी, तो उनकी पार्टी सरकार को दिए जा रहे समर्थन पर दोबारा विचार करेगी. शन्मुगम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री ऐसा आत्मघाती फैसला नहीं लेंगे, लेकिन अगर वो विरोधी दल को सरकार में लाते हैं तो हमारा साथ चलना नामुमकिन हो जाएगा.
फ्लोर टेस्ट और विधायकों का गणित
तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 144 विधायकों के समर्थन से विश्वास मत जीता था. बहुमत साबित करने के लिए 117 विधायकों की जरूरत थी, जिसमें टीवीके के अलावा कांग्रेस, सीपीआई, माकपा, आईयूएमएल और वीसीके के विधायक शामिल थे. लेकिन परदे के पीछे की कहानी यह है कि एआईएडीएमके के भीतर मची रार का फायदा भी विजय को मिला था, जिसके बाद से ही यह गठबंधन डगमगा रहा है.
एआईएडीएमके में दो फाड़ का खेल
एआईएडीएमके के भीतर इस समय बड़ी फूट देखने को मिल रही है. पार्टी के कुल विधायकों में से एस. पी. वेलुमणि और सी. वी. शन्मुगम के नेतृत्व वाले 25 विधायकों के गुट ने 11 मई को हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान परोक्ष रूप से विजय की टीवीके का समर्थन किया था. वहीं दूसरी तरफ, पार्टी प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के वफादार बाकी 22 विधायकों ने इस फ्लोर टेस्ट का खुलकर विरोध किया था.
विचारधारा की लड़ाई और तनाव
लेफ्ट पार्टियों और एआईएडीएमके के बीच वैचारिक मतभेद बहुत पुराने और गहरे हैं. माकपा और अन्य वामपंथी दल हमेशा से एआईएडीएमके की आलोचना करते आए हैं, क्योंकि उसकी नजदीकियां भाजपा के साथ रही हैं. केंद्र की एनडीए सरकार की नीतियों का समर्थन करने की वजह से लेफ्ट पार्टियां एआईएडीएमके को फूटी आंख नहीं सुहातीं, यही वजह है कि वे सरकार में उसकी एंट्री का विरोध कर रही हैं.
क्या दांव पर लगी विजय की कुर्सी?
अब सारा दारोमदार मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के फैसले पर टिका है. यदि वह सरकार को मजबूती देने के लिए एआईएडीएमके के बागी गुट को मंत्री पद देते हैं, तो लेफ्ट बाहर हो जाएगा. हालांकि लेफ्ट के बाहर जाने के बाद भी एआईएडीएमके के 25 विधायकों के दम पर सरकार सुरक्षित रह सकती है, लेकिन शुरुआती दिनों में ही सहयोगियों का इस तरह बागी होना विजय की राजनीतिक परिपक्वता के लिए बड़ी परीक्षा है.
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